National Integration Essay राष्ट्रीय एकता पर निबंध. राष्ट्रीय एकता अपना देश जिन राजनीतिक समस्याओं से जूझ रहा है उनमें से राष्ट्रीय एकता भी एक समस्या है। इस समस्या को समझने के लिए अपने देश की राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक
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| National Integration Essay |
पृष्ठभूमि और परम्परा की जानकारी आवश्यक है।
भौगोलिक दृष्टि से यह देश तीन तरफ से समुद्र और उत्तर की ओर से पर्वत श्रृंखला से घिरा है। मगर नदियों, पहाड़ों और वनों से आवृत होकर भी भौगोलिक स्थितियाँ राष्ट्रीय एकता की दृष्टि से बाधक तत्व नहीं हैं। राजनीतिक दृष्टि से हमारा सम्पूर्ण देश अतीत काल में कभी भी एक शासन के अधीन नहीं रहा।
National Integration Essay राष्ट्रीय एकता पर निबंध
जिन राजाओं ने चक्रवर्ती साम्राज्य स्थापित करने का प्रयास किया वे भी हिमालय से कन्याकुमारी तक और सिन्ध से लेकर असम तक एक शासन स्थापित करने में सफल नहीं रहे। अंग्रेजों ने पूरे देश को किसी न किसी प्रकार से अपने अधीन कर लिया और स्वाधीनता संग्राम के बाद हमें जो राष्ट्र मिला वह खंडित राष्ट्र था।
बंगाल, पंजाब, सिन्ध एवं बलूचिस्तान धार्मिक आधार पर हमसे अलग हो गये और हमारे एक राष्ट्र के तीन राष्ट्र हो गये। फिर भी जो बच गया वह राष्ट्र भी राष्ट्रीय एकता की समस्या से जूझ रहा है। धार्मिक दृष्टि से इस देश में हिन्दू, सिक्ख, मुसलमान, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी धर्म को मानने वाले रहते हैं।
सामाजिक दृष्टि से आदिवासी लोगों के अनेक कबीले देश भर में फैले हैं। इन सबके अलग-अलग रीति-रिवाज है, अलग मानसिकता है। सांस्कृतिक स्तर पर भी इनमें भेद है। जातीय स्वरूप की दृष्टि से इस देश में आर्य, द्रविड़ आष्टिक आदि जाति मूलों के लोग रहते हैं।
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भाषा की दृष्टि से भी भिन्नता है। द्रविड़, आर्य और आग्नेयवंशी भाषा परिवारों की भाषाएँ बोली जाती हैं। इन भाषाओं में विषमता इतनी है कि उनको एक भाषा के साँचे में ढालना कठिन है। इन सब विषमताओं के बावजूद कुछ ऐसे तत्व और प्रक्रियाएँ हैं जो हमें एक सूत्र में बाँधती हैं। वह सूत्र है सबको मिलाकर चलने का, समन्वय का।
आपसी समझदारी और सहिष्णुता ने हमें एक-दूसरे में घुलने-मिलने, एक दूसरे के विचारों और रीति-रिवाजों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया है। वैचारिक स्तर पर एक दृष्टि विकसित हुई है तो आध्यात्मिक विचारों की समानता ने भी हमें जोड़ने का प्रयत्न किया है। इन सबके कारण ही कहा जाता है कि
भारत अनेकता में एकता की भावना वाला देश है। लेकिन सांस्कृतिक एवं मानसिक दृष्टि से लगाव के बावजूद कुछ महत्वाकांक्षी लोगों द्वारा क्षेत्रीयता, भाषा, धर्म एवं भौतिक साधन-सुविधाओं को लेकर जब तब उपद्रव खड़े किए जाते हैं। ऐसे स्वार्थी लोगों को क्षणिक लाभ का लालच इतना आक्रान्त कर लेता है
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कि ये देश के हित को सोच ही नहीं पाते हैं। फलत: हमारी राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा उत्पन्न हो जाता है। धर्म के नाम पर काश्मीर तथा पंजाब में जो विलगाव का कुचक्र वर्षों से चल रहा है उसे हम अच्छी तरह जानते हैं। इसी तरह पूरब में नागालैंड, अरूणाचल प्रदेश आदि में क्षेत्रीय विषमता, सांस्कृतिक-सामाजिक भिन्नता
आदि को आधार बनाकर राष्ट्रीय एकता को चुनौती दी जाती रही है। देश की एकता को तोड़ने के लिए स्वार्थी और देशद्रोही लोगों को उकसाया जाता है और वे भोली-भाली जनता को सब्जबाग दिखाकर गुमराह करने की चेष्टा करते हैं। राष्ट्रीय एकता को डॅवाडोल करने या राष्ट्रद्रोही तत्वों को प्रोत्साहित करने में शत्रु
देशों या हमारी प्रगति से जलने वाले देशों की प्रच्छन्न भूमिका स्पष्ट है। इनकी गुप्तचर एजेन्सियाँ पैसा व्यय कर हमारे अर्थ लोलुप भाईयों को देश की एकता नष्ट करने के लिए इस्तेमाल करती है। इन सभी स्थितियों से बचने के लिए हम अपने नागरिकों में एकता, सद्भाव, धर्मनिरपेक्षता राष्ट्रीय भावना
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आदि भरने की चेष्टा करते हैं। इसमें राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और साहित्यकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। राजनेता अपने आचरण तथा उपदेश से, सामाजिक कार्यकर्ता अपने कार्य से और साहित्यकार विशेषतः कविगण अपनी राष्ट्रवादी कविताओं से जन-जन में राष्ट्रीय भावना भरने का कार्य करते हैं।
- India's Nuclear Power Essay
हमारी दृष्टि में किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र की राष्ट्रीय चेतना को सदैव जगाते रहने की आवश्यकता होती है। सरकार, सेना, प्रशासन, संचार-माध्यम आदि को चाहिए कि वह सतत राष्ट्र को एकता का सन्देश दे और राष्ट्र द्रोहियों तथा बाहरी शत्रुओं की साजिश पर ध्यान रखे। हमें जन-जन के
मन में यह भावना भर देनी है कि राष्ट्र के अस्तित्व पर ही हमारा अस्तित्व टिका है। अतः हमें अपने प्राणों की कीमत पर भी राष्ट्रीय एकता की रक्षा करनी चाहिए और सदैव महसूस करना चाहिए कि हम भारतीय हैं, हम एक हैं।
