Friendship quotes, About friendship, Friendship quotes in Hindi. When a young man moves out of his home and establishes his position in the outside world, the first difficulty is in choosing a friend. If his situation is not completely isolated and strange
![]() |
| Friendship-Quotes |
then people of his acquaintances increase in intensity and within a few days, he gets acquainted with some people. This harmony turns into a growing friendship. So today in this article, we have brought for you the Friendship Quotes of the Best Famous Authors, Writers, Social Workers,
Friendship quotes, About friendship, Friendship quotes in Hindi
मित्रता करने में धीमे रहिये, पर जब कर लीजिये तोउसे मजबूती से निभाइए और उसपर स्थिर रहिये.
![]() |
| Lord-Buddha-friendship-quotes |
किसी जंगली जानवर की अपेक्षा एक कपटी और दुष्ट मित्र से ज्यादा डरना चाहिए,जानवर तो बस आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है,पर एक बुरा मित्र आपकी बुद्धि को चोटिल कर सकता है.
![]() |
| Leo-Buscaglia-friendship-quotes |
एक अकेला गुलाब मेरा बगीचा हो सकता है…एक अकेला दोस्त मेरी दुनिया
व्यवसाय पर आधारित दोस्ती, दोस्ती पेआधारित व्यवसाय से बेहतर है.
![]() |
| Henry-David-Thoreau-friendship-quotes |
मित्रता की भाषा शब्द नहीं अर्थ है.
![]() |
| George-Washington-friendship-quotes |
सभी के साथ विनम्र रहिये, पर कुछ के साथ ही घनिष्ठता बनाइये,और इन कुछ को भी पूर्ण विश्वास करने से पहले अच्छी तरह से जांच लीजिये.
मित्र वो होता है जो आपको जाने औरआपको उसी रूप में चाहे.
एक सच्चा दोस्त कभी आपके रास्ते में नहीं आताजब तक कि आप गलत रास्ते पे ना जा रहे हों.
![]() |
| Aristotle-friendship-quotes |
जो सबका मित्र होता है वो किसी का मित्र नहीं होता है.
मित्रता दो शरीरों में रहने वाली एक आत्मा है.
दोस्त बनने की इच्छा रखना जल्दी का काम है,लेकिन दोस्ती धीमे-धीमे पकने वाला फल है.
मेरे पीछे मत चलो, हो सकता है मैं नेत्रित्व ना कर पाऊं. मेरेआगे मत चलो हो सकता है मैं अनुगमन ना कर सकूँ. बस मेरे साथ चलो मेरे मित्र बनकर.
About friendship
जब कोई युवा पुरुष अपने घर से बाहर निकलकर बाहरी संसार में अपनी स्थिति जमाता है, तब पहली कठिनता उसे मित्र चुनने में पड़ती है । यदि उसकी स्थिति बिल्कुल एकांत और निराली नहीं रहती तो उसकी जान-पहचान के लोग धड़ाधड़ बढ़ते जाते हैं और थोड़े ही दिनों में कुछ लोगों से उसका हेल-मेल हो जाता है ।
यही हेल-मेल बढ़ते-बढ़ते मित्रता (Friendship) के रूप में परिणत हो जाता है । मित्रों के चुनाव की उपयुक्तता पर उसके जीवन की सफलता निर्भर हो जाती है, क्योंकि संगति का गुप्त प्रभाव हमारे आचरण पर बड़ा भारी पड़ता है। हम लोग ऐसे समय में समाज में प्रवेश करके अपना कार्य आरंभ करते हैं,
जबकि हमारा चित्त कोमल और हर तरह का संस्कार ग्रहण करने योग्य रहता है । हमारे भाव अपरिमार्जित और हमारी प्रवृत्ति अपरिपक्व रहती है। हम लोग कच्ची मिट्टी की मूर्ति के समान रहते हैं, जिसे जो जिस रूप में चाहे, उस रूप में ढाले-चाहे राक्षस बनाए चाहे देवता।
Good friends
ऐसे लोगों का साथ करना हमारे लिए बुरा है, जो हमसे अधिक दृढ़ संकल्प के हैं, क्योंकि हमें उनकी हर बात बिना विरोध के मान लेनी पड़ती है । पर ऐसे लोगों का साथ करना और भी बुरा है, जो हमारी ही बात को ऊपर रखते हैं, क्योंकि ऐसी दशा में न तो हमारे ऊपर कोई नियंत्रण रहता है और न हमारे लिए कोई सहारा रहता है ।
दोनों अवस्थाओं में जिस बात का भय रहता है, उसका पता युवकों को प्रायः बहुत कम रहता है। यदि विवेक से काम लिया जाए तो यह भय नहीं रहता, पर युवा पुरुष प्रायः विवेक से-कम काम लेते हैं । कैसे आश्चर्य की बात है कि लोग । एक घोड़ा लेते हैं तो उसके सौ गुण-दोष को परख कर लेते हैं,
पर किसी को मित्र बनाने में उसके पूर्व आचरण और स्वभाव आदि का कुछ भी विचार और अनुसंधान , नहीं करते । वे उसमें सब बातें अच्छी-ही-अच्छी मानकर अपना पूरा विश्वास जमा देते हैं । हँसमुख चेहरा, बातचीत का ढंग, थोड़ी चतुराई या साहस-ये ही दोचार बातें किसी में देखकर लोग चटपट उसे अपना बना लेते हैं।
Meaningful friendship quotes
हम लोग यह नहीं सोचते कि मैत्री का उद्देश्य क्या है, स्या जीवन के व्यवहार में उसका कुछ मूल्य भी है । यह बात हमें नहीं सूझती कि यह ऐसा साधन है, जिससे आत्मशिक्षा का कार्य बहुत सुगम हो जाता है । एक प्राचीन विद्वान् का वचने है, “विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा रहती है। जिसे ऐसा मित्र मिल जाए उसे समझना चाहिए
कि खजाना मिल गया." विश्वासपात्र मित्र जीवन की एक औषध है। हमें अपने मित्रों से यह आशा रखनी चाहिए कि वे उत्तम संकल्पों से हमें दृढ़ करेंगे, दोषों और त्रुटियों से हमें बचाएँगे, हमारे सत्य, पवित्रता और मर्यादा के प्रेम को पुष्ट करेंगे, जब हम कुमार्ग पर पैर रखेंगे, तब वे हमें सचेत करेंगे, जब हम हतोत्साहित होंगे,
True friendship quotes
तब हमें उत्साहित करेंगे । सारांश यह है कि . हमें उत्तमतापूर्वक जीवन-निर्वाह करने में हर तरह से सहायता देंगे । सच्ची* मित्रता (Friendship) में उत्तम वैद्य की-सी निपुणता और परख होती है, अच्छी-से-अच्छी
माता का-सा धैर्य और कोमलता होती है । ऐसी ही मित्रता (Friendship) करने का प्रयत्न प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए।
Friendship in adolescence
छात्रावस्था में मित्रता (Friendship) की धुन सवार रहती है । मित्रता (Friendship) हृदय से उमड़ी पड़ती है। पीछे के जो स्नेह-बंधन होते हैं, उनमें न तो उतनी उमंग रहती है, न उतनी खिन्नता । बाल-मैत्री में जो मग्न करनेवाला आनंद होता है, जो हृदय को बेधनेवाली ईर्ष्या और खिन्नता होती है, वह और कहाँ ? कैसी मधुरता और कैसी अनुरक्ति होती है, कैसा
अपार विश्वास होता है ! हृदय से कैसे उद्गार निकलते हैं ! वर्तमान कैसा आनंदमय दिखाई पड़ता है और भविष्य के संबंध में कैसी लुभानेवाली कल्पनाएँ मन में रहती हैं । कितनी जल्दी बातें लगती हैं और कितनी जल्दी मानना होता है।
Classmate friendship
'सहपाठी की मित्रता' (Friendship) इस उक्ति में हृदय के कितने भारी उथल-पुथल का भाव भरा हुआ है। किन्तु जिस प्रकार युवा पुरुष की मित्रता (Friendship) स्कूल के बालक की मित्रता (Friendship) से दृढ़, शांत और गंभीर होती है, उसी प्रकार हमारी युवावस्था के मित्र बाल्यावस्था के मित्रों से कई बातों में भिन्न होते हैं ।
मैं समझता हूँ कि मित्र चाहते हुए बहुत-से लोग मित्र के आदर्श की कल्पना मन में करते होंगे, पर इस कल्पित आदर्श से तो हमारा काम जीवन की झंझटों में चलता नहीं । सुंदर प्रतिभा, मनभावनी चाल और स्वच्छंद प्रकृति, ये ही दो-चार बातें देखकर मित्रता (Friendship) की जाती है,
पर जीवन-संग्राम में साथ देनेवाले मित्रों से इनसे कुछ अधिक बातें चाहिए । मित्र केवल उसे नहीं कहते, जिसके गुणों की तो हम प्रशंसा करें, पर जिससे हम स्नेह न कर सकें, जिससे अपने छोटे-छोटे काम ही हम निकालते जाएँ, पर भीतर-ही-भीतर घृणा करते रहें । मित्र सच्चे पथ-प्रदर्शक के समान होना चाहिए, जिस पर हम पूरा विश्वास कर सकें।
Friends for life quotes
मित्र भाई के समान होना चाहिए, जिसे हम अपना प्रीति-पात्र बना सकें । हमारे और हमारे मित्र के बीच सच्ची सहानुभूति होनी चाहिए। ऐसी सहानुभूति जिससे एक के हानि-लाभ को दूसरा अपना हानि-लाभ समझे । मित्रता (Friendship) के लिए यह आवश्यक नहीं है कि दो मित्र एक ही प्रकार का कार्य करते हों या एक ही रुचि के हों।
प्रकृति और आचरण की समानता भी आवश्यक या वांछनीय नहीं है । दो भिन्न प्रकृति के मनुष्यों में बराबर प्रीति और मित्रता (Friendship) रही है। राम धीर और शांत प्रकृति के थे, लक्ष्मण उग्र और उद्धत स्वभाव के थे, पर दोनों भाइयों में अत्यंत प्रगाढ़ सनेह था । उन दोनों की मित्रता (Friendship) खूब निभी।
यह कोई बात नहीं है कि एक ही स्वभाव और रुचि के लोगों में ही मित्रता (Friendship) हो सकती है। समाज में विभिन्नता देखकर लोग एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं । जो गुण हममें नहीं हैं, हम चाहते हैं कि कोई ऐसा मित्र मिले, जिसमें वे गुण हों । चिन्ताशील मनुष्य प्रफुल्लित चित्त का साथ ढूँढ़ता है, निर्बल बली का, धीर उत्साही का । उच्च आकांक्षा वाला चंद्रगुप्त युक्ति और उपाय के लिए चाणक्य का मुह ताकता था । नीति-विशारद अकबर मन बहलाने के लिए बीरबल की ओर देखता था।
The duty of a friend is described as
मित्र का कर्त्तव्य इस प्रकार बताया गया है, "उच्च और महान कार्यों में इस प्रकार सहायता देना, मन बढ़ाना और साहस दिलाना कि तुम अपनी-अपनी सामर्थ्य से बाहर काम कर जाओ ।' यह कर्त्तव्य उसी से पूरा होगा, जो दृढ़ चित्त और सत्य-संकल्प का हो ।
इससे हमें ऐसे ही मित्रों की खोज में रहना चाहिए जिनमें हमसे अधिक आत्मबल हो । हमें उनका पल्ला उसी तरह पकड़ना चाहिए, जिस तरह सुग्रीव ने राम का पल्ला पकड़ा था । मित्र हों तो प्रतिष्ठित और शुद्ध हृदय के हों, मृदुल और पुरुषार्थी हों, शिष्ट और सत्यनिष्ठ हों, जिससे हम अपने को उनके भरोसे पर छोड़ सकें और यह विश्वास कर सकें कि उनसे किसी प्रकार का धोखा न होगा।
जो बात ऊपर मित्रों के संबंध में कही गई है, वही जान-पहचानवालों के संबंध में भी ठीक है । जान-पहचान के लोग ऐसे हों, जिनसे हम कुछ लाभ उठा सकते हों, जो हमारे जीवन को उत्तम और आनंदमय बनाने में कुछ सहायता दे सकते हों, यद्यपि
उतनी नहीं जितनी गहरे मित्र दे सकते हैं । मनुष्य का जीवन थोड़ा है, उसमें खोने • के लिए समय नहीं । यदि क, ख और ग हमारे लिए कुछ नहीं कर सकते हैं, न कोई
Friendship words
बुद्धिमानी या विनोद की बातचीत कर सकते हैं, न कोई अच्छी बात बतला सकते हैं, न सहानुभूति द्वारा हमें ढाढ़स बँधा सकते हैं, न हमारे आनंद में सम्मिलित हो सकते हैं, न हमें कर्त्तव्य का ध्यान दिला सकते हैं, तो ईश्वर हमें उनसे दूर ही रखे । हमें
अपने चारों ओर जड़ मूर्तियाँ सजानी नहीं है । आजकल जान-पहचान बढ़ाना कोई बड़ी बात नहीं है । कोई भी युवा पुरुष ऐसे अनेक युवा पुरुषों को पा सकता है, जो उसके साथ थियेटर देखने जाएँगे, नाचरंग में जाएँगे, सैर-सपाटे में जाएँगे, भोजन का निमंत्रण स्वीकार करेंगे।
यदि ऐसे जान-पहचान के लोगों से कुछ हानि न होगी तो लाभ भी न होगा। पर यदि हानि होगी तो बड़ी भारी होगी । सोचो तो तुम्हारा जीवन कितना नष्ट होगा । यदि ये जान-पहचान के लोग उन मनचले युवकों में से निकलें, जो अमीरों की बराइयों और मूर्खताओं की नकल किया करते हैं,
दिन-रात बनाव सिंगार में रहा करते हैं, महफिलों में “ओ-हो-हो”, “वाह-वाह' किया करते हैं, गलियों में ठट्ठा मारते हैं और सिगरेट का धुआँ उड़ाते हैं । ऐसे नवयुवकों से बढ़कर शून्य, निस्सार
friends circle
और शोचनीय जीवन और किसका है ? वे अच्छी बातों के सच्चे आनंद से कोसों दूर हैं । उनके लिए न तो संसार में सुंदर मनोहर उक्ति वाले कवि हुए हैं और न संसार में सुंदर आचरण वाले महात्मा । उनके लिए न तो बड़े वीर अद्भुत कर्म कर गए हैं
और न बड़े-बड़े ग्रंथकार ऐसे विचार छोड़ गए हैं, जिनसे मनुष्य जाति के हृदय में सात्विकता की उमंगें उठती हैं। उनके लिए फूल-पत्तियों में कोई सौन्दर्य नहीं, झरनों के कल-कल में मधुर संगीत नहीं, अनंत सागर तरंगों में गंभीर रहस्यों का आभास नहीं, उनके भाग्य में सच्चे प्रयत्न और
पुरुषार्थ का आनंद नहीं, उनके भाग्य में, सच्ची प्रीति का सुख और कोमल हृदय की शांति नहीं । जिनकी आत्मा अपने इंद्रिय-विषयों में ही लिप्त है, जिनका हृदय नीचाशयों और कुत्सित विचारों से कलुषित है, ऐसे नशोन्मुख प्राणियों को दिन-दिन अंधकार में पतित होते देख कौन ऐसा होगा जो तरस न खाएगा ? हमें ऐसे प्राणियों का साथ न करना चाहिए ।
Make new friends
मकदूनिया का बादशाह डेमेट्रियस कभी-कभी राज्य के सब काम छोड़कर अपने ही मेल के दस-पाँच साथियों को लेकर विषय-वासना में लिप्त रहा करता था । एक । बार बीमारी का बहाना करके इसी प्रकार वह अपने दिन काट रहा था। इसी बीच उसका पिता उससे मिलने के लिए गया और उसने एक हँसमुख जवान को कोठरी . से बाहर निकलते देखा । जब पिता कोठरी के भीतर पहुँचा तब डेमेट्रियस ने कहा,
"ज्वर ने मुझे अभी छोड़ा है ।" पिता ने कहा,
“हाँ, ठीक है, वह दरवाजे पर मुझे मिला था।"
कुसंग का ज्चर सबसे भयानक होता है। यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि बुद्धि का भी क्षय करता है । किसी युवा पुरुष की संगति यदि बुरी होगी तो वह उसके पैरों में बँधी चक्की के समान होगी, जो उसे दिन-रात अवनति के गड्ढे में गिराती जाएगी और यदि अच्छी होगी
तो सहारा देने वाली बाहु के समान होगी, जो उसे निरंतर उन्नति की ओर उठाती जाएगी। इंग्लैण्ड के एक विद्वान् को युवावस्था में राज-दरबारियों में जगह नहीं मिली। इस पर जिन्दगी भर वह अपने भाग्य को सराहता रहा । बहुत-से लोग तो इसे अपना बड़ा 'भारी दुर्भाग्य समझते, पर वह अच्छी तरह जानता था
#about friendship
कि वहाँ वह बुरे लोगों की संगति में पड़ता जो उसकी आध्यात्मिक उन्नति में बाधक होते । बहुत-से लोग ऐसे होते हैं, जिनके घड़ी भर के साथ से भी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, क्योंकि उतने ही बीच में ऐसीऐसी बातें कही जाती हैं जो कानों में न पड़नी चाहिए, चित्त पर ऐसे प्रभाव पड़ते हैं,
जिनसे उसकी पवित्रता का नाश होता है। बुराई अटल भाव धारण करके बैठती है। बुरी बातें हमारी धारणा में बहुत दिनों तक टिकती हैं । इस बात को प्रायः सभी लोग जानते हैं कि भद्दे व फूहड़ गीत जितनी जल्दी ध्यान पर चढ़ते हैं, उतनी जल्दी कोई गंभीर या अच्छी बात नहीं।
एक बार एक मित्र ने मुझसे कहा कि उसने लड़कपन में कहीं से बुरी कहावत सुंनी थी, जिसका ध्यान वह लाख चेष्टा करता है कि न आए, पर बार-बार आता है। जिन भावनाओं को हम दूर रखना चाहते हैं, जिन बातों को . हम याद करना नहीं चाहते, वे बार-बार हृदय में उठती हैं और बेधती हैं।
अतः तुम पूरी चौकसी रखो, ऐसे लोगों को साथी न बनाओ जो अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातों से तुम्हें हँसाना चाहें । सावधान रहो । ऐसा न हो कि पहले-पहल, तुम इसे एक बहुत सामान्य बात समझो और सोचो कि एक बार ऐसा हुआ, फिर ऐसा न होगा अथवा तुम्हारे चरित्रबल का ऐसा प्रभाव
best quotes for best friend
पड़ेगा कि ऐसी बातें बकने वाले आगे चलकर आप सुधर जाएँगे । नहीं, ऐसा नहीं होगा। जब एक बार मनुष्य अपना पैर कीचड़ में डाल देता है, तब फिर यह नहीं देखता कि वह कहाँ और कैसी जगह पैर रखता है। धीरेधीरे उन बुरी बातों में अभ्यस्त होते-होते तुम्हारी घृणा कम हो जाएगी।
पीछे तुम्हें उनसे चिढ़ न मालूम होगी, क्योंकि तुम यह सोचने लगोगे कि चिढ़ने की बात ही क्या है। तुम्हारा विवेक कुंठित हो जाएगा और तुम्हें भले-बुरे की पहचान न रह जाएगी । अंत में होते-होते तुम भी बुराई के भक्त बन जाओगे । अतः हृदय को उज्ज्चल और निष्कलंक रखने का सबसे अच्छा उपाय यही है कि बुरी संगति की छूत से बचो । एक पुरानी कहावत है
"काजल की कोठरी में कैसो ही सयाने जाय । एक लीक काजल को लागि है पै लागि है।"










