Jahan sumati tahan sampati nana जहाँ सुमति तहाँ संपत्ति नाना। तुलसीदास. जब मनुष्य में सुमति अर्थात् सद्बुद्धि होती है तो वह अच्छे मार्ग तथा धर्म का अनुसरण करता है। सद्बुद्धि के प्रभाव से मनुष्य का वैभव एवं सुख-सम्पत्ति की वृद्धि होती है। इसी प्रकार जब कुमति से व्यक्ति अन्धा होता है तो उसके दुष्प्रभाव में वह अधर्म पर चलने लगता है
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Jahan sumati tahan sampati nana जहाँ सुमति तहाँ संपत्ति नाना। तुलसीदास
और इस प्रयास में सर्वस्व त्याग देता है। सर्वत्र कलह एवं झगड़ों में वृद्धि होती है। सुमति से सब कार्य बन जाते हैं और वह यथार्थ शान्ति को प्राप्त कर लेता है। सुमति ही मनुष्य को धर्म तथा ज्ञान की ओर ले जाती है, यदि मनुष्य कुमति से चलता है तो विपत्तियों की संख्या बढ़ जाती है। निराशा के साथ ही मनुष्यों को विफलताओं का सामना करना पड़ता है।
