Nach na jaane aangan tedha Muhavare Ka Arth. नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

Nach na jaane aangan tedha Muhavare Ka Arth. नाच न जाने आँगन टेढ़ा। मनुष्य में गुण न होने पर कार्य नहीं होता है और वह अपनी मूर्खता ही दिखाता है, गुण रहित व्यक्ति स्वयं के दोष देखता नहीं, दूसरों पर आरोप लगा देता है। स्वयं कार्य करने की शक्ति एवं क्षमता रखता नहीं है और असफल होने पर दूसरों के ऊपर अभियोग लगा देता है।

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Nach na jaane aangan tedha Muhavare Ka Arth. नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

नाचना तो आता नहीं है और आँगन को टेढ़ा बता देता है अर्थात् स्वयं तो कार्य करने में असमर्थ है, दूसरों की शक्ति देखना चाहता है और उसके ऊपर ही दोष लगा देता है। इस प्रकार अपना पीछा छुड़ाता है। इसके विपरीत चतुर व्यक्ति अपने कार्य भी कर लेता है 

और किसी के विवाद में भी नहीं पड़ता है, साथ ही व्यर्थ में समय नष्ट नहीं करता है। वह सदैव आत्म संतुष्ट रहता है। इसलिए चतुर एवं गुण सम्पन्न व्यक्ति जीवन में प्रगति करता है।

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