Atishay Ragad kare jo koi. अतिशय रगड़ करे जो कोई. अनल प्रकट चंदन ते होई।" चन्दन एक शीतल पदार्थ है, उससे अग्नि उत्पन्न करने की बात वस्तुतः आश्चर्यजनक ही है। परन्तु, लौकिक रीति के अनुसार यदि उसे भी रगड़ा जाए तो वह भी अग्नि उत्पन्न करता है। व्यक्ति कितने भी शांत स्वभाव वाला हा, परन्तु यदि उसको अत्यधिक सताया जाएगा, तो उसको भी क्रोध आ जाता है।
Atishay-Ragad-kare-jo-koi
Atishay Ragad kare jo koi. अतिशय रगड़ करे जो कोई, जाके पैर न फटी बिवाई, होनहार बिरवान के होत चिकने पात।
"जाके पैर न फटी बिवाई,
सो क्या जाने पीर पराई।" जिस मनुष्य के पैरों में बिवाई नहीं फटती, वह दूसरों के पाँवों की बिवाई से उत्पन्न पीड़ा का अनुमान किस प्रकार कर सकता है। वास्तव में वही व्यक्ति दूसरों की पीड़ा का अनुमान लगा सकता है, जो स्वयं उस पीड़ा से ग्रसित रह चुका है।
"होनहार बिरवान के होत चिकने पात।"
सभी पौधे बढ़कर बड़े एवं फलदायक वृक्ष नहीं बनते हैं। केवल चिकने पत्ते वाले पौधे ही बड़े वृक्ष बन पाते हैं। इस प्रकार जो मनुष्य भविष्य में महान् बनने वाले होते हैं, उनके गुण छोटी अवस्था में ही प्रकट होने लगते हैं, जिससे उनके होनहार होने का अनुमान होता है।
