जब कृष्ण की बात की जाती है तो उनके बारे में कई गलतफहमियां सामने आती हैं। जब हम कृष्ण कहते हैं तो ज्यादातर लोग बस मक्खन, लड़कियों और बांसुरी के बारे में सोचते हैं।
लेकिन हमें समझना चाहिए कि मक्खन में उनकी रुचि सिर्फ 6 या 8 साल की उम्र तक ही थी। और लड़कियों का साथ सिर्फ 16 की उम्र तक था। 16 की उम्र में जब उनके गुरु सानदीपानी ने यह समझाया कि जीवन का उद्देश्य क्या है। सबसे पहले उन्होंने वृंदावन छोड़ दिया और कभी वापस नहीं गए,
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| About Krishna in Hindi |
कभी वापस नहीं गए ना तो अपने रिश्तेदारों से मिलने नही वहां के लड़के लड़कियों से मिलने। वही उसका अंत हो गया। 16 की उम्र में चले गए जब वह जा रहे थे। आज जब हम कृष्ण कहते हैं तो हम राधे कृष्ण कहते हैं। राधे।। कृष्ण से पहले आती क्योंकि उनका प्रेम उनकी करीबी,
About Krishna in Hindi || Facts about Krishna || About lord Krishna
उनकी प्रेम लीला ने इस उपमहाद्वीप की पूरी संस्कृति की कल्पना में इस तरह जगह पाई है। कि हम कृष्ण राधे नहीं कहते हम राधे कृष्ण कहते हैं। लेकिन सोलह की उम्र में उन्होंने राधे को आखरी बार देखा और फिर कभी नहीं देखा। और 16 की उम्र में जब जा रहे थे वह बोले मैं यह बांसुरी तुम्हारे लिए बजाता हूं अब मैं जा रहा हूं।
और वापस नहीं आऊंगा। तो तुम्हें एक भेंट के रूप में। क्योंकि तुमसे इतना प्रेम है मैं यह बांसुरी तुम्हें देता हूं। और अब कभी बांसुरी नहीं बजाऊंगा और उन्होंने नहीं बचाई। उसके बाद राधा ने बांसुरी बजाई उन्होंने 16 की उम्र के बाद कभी नहीं बचाई। 16 से 21 की उम्र तक वह ब्रह्मचारी की तरह जिए।
उन्होंने सन्यास ले लिया ब्रह्मचारी की तरह जिए। जबरदस्त साधना की उसके बाद उनका पूरा जीवन समर्पित था राजनीतिक प्रक्रिया और आध्यात्मिक प्रक्रिया का मिलन करवाने के लिए। इसका अंत तवाही के साथ हुआ लेकिन उन्होंने हर संभव काम किया। इन चीजों की कभी बात नहीं की जाती।
About Krishna in Hindi || Facts about Krishna || About lord Krishna
उत्तरी भारत के मैदानों में उन्होंने एक हजार से ज्यादा आश्रम बनवाएं। क्योंकि वह आध्यात्मिक प्रक्रिया को अलग चीज नहीं बनाना चाहते थे। वह आध्यात्मिक प्रक्रिया को जीवन का हिस्सा बनाना चाहते थे। जैसे हम जीते हैं, जैसे हम ब्रश करते हैं, वैसे ही ध्यान करें। वह आध्यात्मिक प्रक्रिया को एक अलग तत्व की तरह नहीं।
बल्कि जीवन की मुख्यधारा में लाना चाहते थे। विशेष रूप से देशों के शासकों के जीवन में उन सभी देशों के जो उस समय मिलकर भारत बनाते थे। उनका मिशन था उस समय की राजनीतिक प्रक्रिया को आध्यात्मिक बनाना। तो साफ है कि उन दिनों की राजनीति लोकतांत्रिक नहीं थी।
तो उन्होंने सोचा की सबसे जरूरी चीज है अगर शासकों तक अध्यात्म पहुंचे। तो फायदा स्वाभाविक रूप से लोगों को मिलेगा। जो लोग दूसरे लोगों के जीवन को संभालते हैं। जैसे राजा या प्रधानमंत्री या आज के राष्ट्रपति या किसी कंपनी के सीईओ क्योंकि उनके नीचे लाखों लोग काम करते हैं।
About lord Krishna
जब आपके पास ऐसी जिम्मेदारी है तो हर विचार जो पैदा करते हैं। हर भावना पैदा करते हैं। हर काम जो आप करते हैं। वह लाखों लोगों की जिंदगी को प्रभावित करता है। जब आपके पास ऐसी जिम्मेदारी है तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप एक अच्छी स्थिति में आप क्या सोचते हैं।
क्या महसूस करते हैं। वह ऐसे किसी भीतरी स्थान से आना चाहिए। जो लोगों की खुशहाली के लिए काम करें। अगर मैं एक सीमित नजरिए से जीवन को देखता हूं तो हर विचार जो मैं पैदा करता हूं हर भावना जो मेरे अंदर है। उससे लोगों का जीवन बर्बाद होगा। वह काम जो मैं करता हूं
और विशेष रूप से वह काम जो मैं नहीं करता जो मुझे करनी चाहिए। उन से लोगों के जीवन में जबरदस्त नुकसान होगा। तो उन्होंने सिर्फ शासकों पर ध्यान दिया। वह चाहते थे कि उस समय के राजा आध्यात्मिक हो जाए। दुर्भाग्य से इसका अंत तक भाई के साथ हुआ।
Facts about Krishna
- मक्खन में कृष्ण की रुचि सिर्फ 6 या 8 साल की उम्र तक ही थी।
- कृष्णा और लड़कियों का साथ सिर्फ 16 की उम्र तक ही था।
- सोलह की उम्र में Krishna ने राधे को आखरी बार देखा और फिर कभी नहीं देखा।
- सानदीपानी कृष्ण के गुरु ने समझाया कि जीवन का उद्देश्य क्या है।
- कृष्ण ने सोलह की उम्र में ही वृन्दावन छोर दिया था। और कभी वापस नहीं गए।
- Krishna ने अपनी बांसुरी राधा को देते हुवे बोला अब मैं कभी बांसुरी नहीं बजाऊंगा।
- 16 से 21 की उम्र तक Krishna ब्रह्मचारी की तरह जिए।
Kurukshetra Ki TAbahi || About lord Krishna
कुरुक्षेत्र की तबाही एक भयंकर युद्ध जिसमें पुरुषों की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई। पर फिर भी हम उनकी पूजा करते हैं। हर वह चीज जो वो रचना चाहते थे वह असफल हो गई कुरुक्षेत्र युद्ध के साथ। एक चीज जो उन्होंने हर हाल में रोकने की कोशिश की वह था यह युद्ध लेकिन सबसे भयंकर युद्ध हुआ।
वह खुद उनके अपने परिजन आपस में लड़े और एक दूसरे को मारा। हम उन्हें भगवान कहते हैं क्योंकि इस सब के बीच वह आनंदित थे। वह अछूते थे एक भयंकर सच्चाई एक भयंकर नाटक से जो उनके आसपास हो रहा था पर फिर भी अछूते। इसीलिए हम उन्हें भगवान कहते हैं। ये आप भी कर सकते हैं
आप दुनिया में सबसे सफल बनेंगे या नहीं यह कई सच्चाई पर निर्भर है। पर क्या आप एक सफल मनुष्य मतलब आप अपना जीवन जागरूक होकर चला सकते हैं। या जब जीवन आपको परेशान करेगा तो आप एक जानवर बन जाएंगे। यही सवाल है अगर यह सवाल आप सफलता से संभाल लेते हैं तो हम आपको भी भगवान कहेंगे।
