Jo garajte hain vo baraste nahi जो गरजते हैं, वो बरसते नहीं। वस्तु के रूप पर मनुष्य को मोहित नहीं होना चाहिए। रूप की अपेक्षा गुण को अधिक महत्त्व देना चाहिए। इसी प्रकार बरसने वाले बादल गरजते नहीं,
Jo garajte hain vo baraste nahi || जो गरजते हैं, वो बरसते नहीं।
वह तो जल की वर्षा कर देते हैं। जलयुक्त बादल तो शब्दहीन होते हैं, इसी प्रकार शील गुण सम्पन्न व्यक्ति अहंकार से हीन होते हैं। नम्रता ही उनके चरित्र का प्रमुख गुण है। करनी अच्छे लक्षणों का द्योतक है। करने वाले कहते नहीं, कहने वाले करते नहीं।
