दैव दैव आलसी पुकारा मुहावरे का अर्थ | Daiv daiv alsi pukara Muhavare ka Arth

दैव दैव आलसी पुकारा मुहावरे का अर्थ | Daiv daiv alsi pukara Muhavare ka Arth. दैव शब्द का प्रयोग नियति या भाग्य के अर्थ में होता है। मनुष्य के जीवन में दो तत्वों की प्रधानता है-भाग्य और पुरुषार्थ। व्यक्ति पुरुषार्थ करता है, कर्म करता है। 

Daiv-daiv-alsi-pukara-Muhavare-ka-Arth
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वह हर विषम परिस्थिति से लड़ने का प्रयास करता है। अपनी समझदारी संयम और जुझारूपन से वह भाग्य को बदलने की चेष्टा करता है। फिर भी वह प्रायः भाग्य के हाथों पराजित हो जाता है। लेकिन वह हार नहीं मानता है।

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इसके विपरीत जो लोग अकर्मण्य होते हैं। आलसी होते हैं वे बार-बार भाग्य की दोहाई देते हैं और अपनी बुरी दशा, गरीबी, पतन आदि के लिए भाग्य को जिम्मेदार ठहराते हैं। वे बार-बार यही कहते हैं कि मेरे भाग्य में दुख लिखा है। अतः पुरुषार्थ करने से कुछ नहीं होगा कर्म करना बेकार है 

अत: भाग्य के भरोसे बैठो। वे इस बात को स्वीकार नहीं करते कि पुरुषार्थी भाग्य की लकीरें बदल देता है। आलसियों का आलस्य भाग्य भरोसे की आड़ में छिप जाता है। इसी आधार पर माना जाता है कि हर बात में दैव का नाम लेना उसी के मत्थे अपनी दुर्दशा का दोष मढ़ देना आलसियों का जीवन मंत्र होता है।


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