आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास मुहावरे का अर्थ | Aaye the hari bhajan ko otan lage kapas Muhavare ka Arth

आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास मुहावरे का अर्थ | Aaye the hari bhajan ko otan lage kapas Muhavare ka Arth. आध्यात्मिक दृष्टि से हमारा देश परलोक सुधारने के लिए या तो भगवान का पूजन-भजन करता है या अच्छे काम करके पुण्य संचय करना चाहता है। यह काम उसे श्रेष्ठ लगता है और इसी को करना वह जीवन का उद्देश्य मानता है।

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आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास मुहावरे का अर्थ | Aaye the hari bhajan ko otan lage kapas Muhavare ka Arth

इसकी तुलना में वह भौतिक जीवन की सुख-सुविधा के लिए निरन्तर प्रयत्न करने को विकार मानता अतः उसकी दृष्टि में सांसारिक जीवन माया है. गोरखधंधा है, महत्वहीन काम है। आहार निद्रा-भय-मैथुन पशु का लक्षण है। अत: सुख-सुविधा की सीमा में जीना पशुता का लक्षण है।

" इसी आधार पर समझदार लोग मानते हैं कि कपास ओटना निरर्थक काम है और हरिभजन सार्थक। हम इस धरती पर हरिभजन के लिए आये हैं, श्रेष्ठ कर्म करने आये हैं, कपास ओटने नहीं। महत्वहीन, क्षुद्र, और व्यर्थ के कामों में जीवन गँवाने वाले लोग अधम हैं, पशु हैं। 

वे व्यर्थ में मूल्यवान जीवन को नष्ट कर रहे हैं। ऐसे लोगों को लक्षित कर कहा गया है कि ये लोग धरती पर ईश्वर द्वारा भेजे गये थे हरि का भजन करने के लिए जबकि ये यहाँ कपास ओटने लगे हैं। अर्थात् सोने जैसे जीवन को माटी में परिणत कर रहे हैं। यह लोकोक्ति सांसारिकता के बीच में फंसे लोगों के जीवन की व्यर्थता बताती है।


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