Maithili Sharan Gupt Rachit Yashodhara || मैथिलीशरण गुप्त रचित 'यशोधरा' उनकी किस प्रकार की काव्य कृति है ? स्पष्ट करें।

Maithili Sharan Gupt Rachit Yashodhara || मैथिलीशरण गुप्त रचित 'यशोधरा' उनकी किस प्रकार की काव्य कृति है ? स्पष्ट करें।. मैथिलीशरण गुप्त रचित 'यशोधरा' उनका एक खंडकाव्य है जो उनके कवि-जीवन के उत्कर्ष काल सन् 1925 ई. से सन् 1937 ई. के बीच की कालावधि की दूसरी महत्वपूर्ण उपलब्धि है पहली

Maithili-Sharan-Gupt-Rachit-Yashodhara

Maithili-Sharan-Gupt-Rachit-Yashodhara
काव्योपलब्धि उनकी काव्य-कृति 'साकेत' है जो आधुनिक महाकाव्य के रूप में मान्य है, जिनका प्रकाशन क्रमशः सन् 1931 और सन् 1932 ई. में हुआ। _ कहना नहीं होगा कि 'यशोधरा' समस्त विश्व-साहित्य की अनमोल काव्य-कृतियों में कवि के नवीन साहित्य की अनमोल काव्यकृतियों में कवि के नवीन परिवर्तित दृष्टिकोण का सुफल है।

Maithili Sharan Gupt Rachit Yashodhara


इसमें कवि का जीवन-दर्शन उनके अन्य काव्यों की अपेक्षा अधिक स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। इसमें कवि का उद्देश्य ही परस्पर-विरोधी प्रवृतियों गौतम की पलायनवादी मनोवृति और जीवन-संग्राम से जूझने की चिरन्तन कामना के द्वन्द्वोद्घाटन द्वारा नवयुग के लिए नवीन वैष्णव धर्म का स्थापन और प्रतिपादन रहा है।

'यशोधरा' काव्य की संपूर्ण कथा के अन्तर्गत केन्द्रीयता प्राप्त नारी चरित्र के रूप में यशोधरा सम्पूर्ण नारी-जाति का प्रतिनिधित्व करती है जिसके माध्यम से साम्प्रतिक युग की समस्त नारी-जाति को नवजागरण का संदेश मिलता है। यशोधरा के चरित्र द्वारा कवि ने नारी की महत्ता पर सर्वाधिक बल दिया है। उसके माध्यम से यह सिद्ध किया गया है 

नारी अपने पति के लिए पथ-बाधा नहीं होकर जीवन-सहचरी है और अपने कर्तव्यों की उसे पूरी समझ है। वह यह बताना चाहती है कि नारी के बिना पुरुष अधूरा है उसका जीवन अधूरा है, अपूर्ण है। स्पष्ट है कि यशोधरा अपने अधिकार को प्राप्त करना चाहती है और साथ ही वह पुरुषों को यह बतलाना चाहती है कि नारी का मान अकारण नहीं सकारण है वह पुरुषों से किसी मायने में भी दीन-हीन नहीं है।

'यशोधरा' काव्य में युग-युग की काव्योपेक्षिता नारी यशोधरा का चरित्रोद्धार करने के क्रम में ही उसके व्यक्तित्व के वैशिष्ट्य पर प्रकाश डाला गया है। उसके व्यक्तित्व के जिन गुणों को महत्व दिया गया है उनके आगे गौतम के गुण अधिक महत्व नहीं रखते हैं। 

मैथिलीशरण गुप्त रचित 'यशोधरा' उनकी किस प्रकार की काव्य कृति है ? स्पष्ट करें।


यह सही है कि गौतम के गुणों के आगे यशोधरा के गुण के महत्वपूर्ण प्रमाणित नहीं होने के कारण ही कवियों-लेखकों द्वारा उन्हें विस्मृत किया गया था जैसा कि
प्रो. रामदीन पाण्डेय मानते हैं

"प्रथम यह कि उसने (यशोधरा ने) लोक, कुटुम्ब या समाज के कल्याण के लिए कोई ऐसा संस्मरणीय काम न किया जो जातीय साहित्य में स्थायी स्थान ग्रहण कर सके। द्वितीय यह कि यशोधरा में ऐसे गुण होंगे जो गौतम के उत्कृष्ट गुणों के सामने उल्लेखनीय प्रमाणित नहीं हुए। सुतरा वे किसी कवि या लेखक का ध्यान आकर्षित न कर सके।"

Patrachar  Sarkari Patrachar........... Ke Vibhinn Roop

यों तो 'यशोधरा' काव्य में यशोधरा कई नारी-रूपों में उपस्थित हुई है, यथा-कामिनी, अनुरागिनी, जननी, मानिनी, विरहिणी उसके कई रूप यहाँ दृष्टिगोचर होते हैं किन्तु उसका मानिनी-रूप इस काव्य में अधिक महत्व प्राप्त करता है। सच कहा जाय तो इस रूप में उसका जो अभिनव चरित्र प्रस्तुत हुआ है वह गुप्तजी की मौलिक चरित्र-सृष्टि है जिसपर वर्तमान युग के नारी आन्दोलन का पूरा प्रभाव स्पष्ट है 

जिसका आधार उनकी वैष्णवता है।
निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि 'यशोधरा' गुप्तजी की वह काव्योपलब्धि है जिसमें यशोधरा के अभिनव चरित्र के माध्यम से कवि द्वारा समस्त नारी जाति का गौरव-गान प्रस्तुत करते हुए नारी को सबला सिद्ध किया गया है।

I am a student web designer, I can give you a WordPress website by designing a professional website and if you want to see what website I design, Click on this link. click here website demo

Post a Comment

© Kiss Shayari. All rights reserved. Distributed by StatusClinic