Gulzar के नाम से प्रसिद्ध सम्पूर्ण सिंह कालरा जी. का जन्म-18 अगस्त 1936 को भारत के झेलम जिला। पंजाब के दीना गाँव, जो अब पाकिस्तान में है हुआ था। हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार (lyricist) हैं। इसके अतिरिक्त वे एक कवि, पटकथा (script) लेखक,
Dil Par Dastak Dene Kaun A Nikala Hai Kis Ki Ahat Sunata Hun Virane Mein
Rat Bhar Baten Karate Hain Tare Rat Kate Koi Kidhar Tanha
Sans Mausam Ki Bhi Kuchh Der Ko Chalane Lagati Koi Jhonka Tiri Palakon Ki Hava Ka Hota
100 + Great Gulzar shayari Aur Gulzar poetry hindi me
फ़िल्म निर्देशक (film director) नाटककार तथा प्रसिद्ध (famous) शायर भी हैं। उनकी रचनाएँ (compositions) मुख्यतः हिन्दी, उर्दू तथा पंजाबी में हैं, लेकिन ब्रज भाषा, खड़ी बोली, मारवाड़ी और हरियाणवी में भी इन्होंने काफी रचनायएँ कीं।साँस मौसम की भी कुछ देर को चलने लगती कोई
झोंका तिरी पलकों की हवा का होता
Gulzar Shayari
Gulzar को वर्ष 2002 में साहित्य अकादमी पुरस्कार ( Sahitya Akademi Award ) 2008 में भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2009 में डैनी बॉयल निर्देशित फ़िल्म स्लम्डाग मिलियनेयर ( Movie Slumdog Millionaire) में उनके द्वारा लिखे गीत जय हो के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत का ऑस्कर पुरस्कार भी मिल चुका है। इसी गीत के लिये उन्हें ग्रैमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।100 + Great Gulzar shayari Aur Gulzar poetry hindi me
रात भर बातें करते हैं तारे रात
काटे कोई किधर तन्हा
जागने पर भी नहीं आँख से गिरतीं किर्चेंइस तरह ख़्वाबों से आँखें नहीं फोड़ा करते
Gulzar shayari on love
वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है
गुलज़ार शायरी
आप के बा'द हर घड़ी हम नेआप के साथ ही गुज़ारी है
दिखाई देते हैं धुँद में जैसे साए कोई मगरबुलाने से वक़्त लौटे न आए कोई
हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में रुक
कर अपना ही इंतिज़ार किया
Gulzar shayari on love
कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ उन से
कितना कुछ कहने की कोशिश की
आइना देख कर तसल्ली हुई हम
को इस घर में जानता है कोई
Gulzar hindi poetry
Gulzar-hindi-poetry
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा
था आज की दास्ताँ हमारी है
Gulzar-Shayari
दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है
किस की आहट सुनता हूँ वीराने में
लब पे आई मिरी ग़ज़ल शायद वो अकेले हैं आज-कल शायद
खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं हवा चले न चले दिन पलटते रहते हैं
उनकी ना थी कोई खता हम ही गलत समझ बैठेवो Mohabbat से बात करते थे हम Mohabbat समझ बैठे !
लौटने का ख्याल भी आए तो बस चले आना,इंतजार आज भी बड़ी बेसब्री से है तुम्हारा..
मुकम्मल इश्क से ज्यादा तो चर्चे अधूरी Mohabbat के होते हैं !तमाशा Zindagi का हुआ, कलाकार सब अपने निकले !
किसी ने मुझसे पूछा की दर्द की कीमत क्या है.?मैंने कहा, मुझे नही पता मुझे लोग फ्री में दे जाते हैं !
इश्क़ की तलाश में क्यों निकलते हो तुम,इश्क़ खुद तलाश लेता है जिसे बर्बाद करना होता है।
दोस्ती रूह में उतरा हुआ रिश्ता है साहब,मुलाकातें कम होने से दोस्ती कम नही होती..
इतना लंबा कश लो यारो, दम निकल जाएZindagi सुलगाओ यारों, गम निकल जाए
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तुझ से बिछड़ कर कब ये हुआ कि मर गए,
तेरे दिन भी गुजर गए और मेरे दिन भी गुजर गए
आऊं तो सुबह, जाऊं तो मेरा नाम शबा लिखना,
बर्फ पड़े तो बर्फ पे मेरा नाम दुआ लिखना
वो शख़्स जो कभी मेरा था ही नही,
उसने मुझे किसी और का भी नही होने दिया.
सालों बाद मिले वो गले लगाकर रोने लगे,
जाते वक्त जिसने कहा था तुम्हारे जैसे हज़ार मिलेंगे.
वो चेहरे जो रौशन हैं लौ की तरह उन्हें ढूंढने की जरूरत नही
मेरी आँख में झाँक कर देख लो तुम्हें आइने की जरूरत नही
उड़ते पैरों के तले जब बहती है जमीं मुड़के हमने कोई मंज़िल देखी तो नही
रात दिन हम राहों पर शामो सहर करते हैं राह पे रहते हैं यादों पे बसर करते हैं
हंसना मुझे भी आता था पर किसी ने रोना सिखा दिया,
बोलने में माहिर हम भी थे किसी ने चुप रहना सिखा दिया..
जब भी आंखों में अश्क भर आए लोग कुछ डूबते नजर आए
चांद जितने भी गुम हुए शब के सब के इल्ज़ाम मेरे सर आए
जिन दिनों आप रहते थे, आंख में धूप रहती थी
अब तो जाले ही जाले हैं, ये भी जाने ही वाले हैं.
मेरे उजड़े उजड़े से होठों में बड़ी सहमी सहमी रहती है जबाँ
मेरे हाथों पैरों में खून नही मेरे तन बदन में बहता है धुँआ
जबसे तुम्हारे नाम की मिसरी होंठ लगाई है
मीठा सा गम है, और मीठी सी तन्हाई है.
वक्त कटता भी नही वक्त रुकता भी नही
दिल है सजदे में मगर इश्क झुकता भी नही
वक्त सालों की धुंध से निकल जायेगा
तेरा चेहरा नज़र से पिघल जायेगा
कोई रंग नही होता बारिश के पानी में,
फिर भी फिजा को रंगीन बना देती है..
एक बार जब तुमको बरसते पानियों के पार देखा था यूँ लगा था जैसे गुनगुनाता एक आबशार देखा था
तब से मेरी नींद में बसती रहती हो बोलती बहुत हो और हँसती रहती हो.
खून निकले तो ज़ख्म लगती है वरना हर चोट नज़्म लगती है.
होती नही ये मगर हो जाये ऐसा अगर
तू ही नज़र आए तू जब भी उठे ये नज़र
वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है
वो कल भी पास पास थी वो आज भी करीब है
मेरा ख्याल है अभी, झुकी हुई निगाह में खिली हुई हँसी भी है, दबी हुई सी चाह में
मैं जानता हूं, मेरा नाम गुनगुना रही है वो यही ख्याल है मुझे, के साथ आ रही है वो
तुम्हें Zindagi के उजाले मुबारक अंधेरे हमें आज रास आ गए हैं
तुम्हें पा के हम खुद से दूर हो गए थे तुम्हें छोड़कर अपने पास आ गए हैं
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उतर रही हो या चढ़ रही हो ? क्या मेरी मुश्किलों को पढ़ रही हो ?
सुरमे से लिखे तेरे वादे आँखों की जबानी आते हैं
मेरे रुमालों पे लब तेरे बाँध के निशानी जाते हैं
इतने बुरे नही थे जितने इल्ज़ाम लगाए लोगों ने,
कुछ किस्मत खराब थी कुछ आग लगाई लोगों ने..
जीना भूले थे कहां याद नहीं! तुमको पाया है जहाँ सांस फिर आई वहीं
तेरे इश्क़ में तू क्या जाने कितने ख्वाब पिरोता हूं
एक सदी तक जागता हूं मैं एक सदी तक सोता हूं
गुल पोश कभी इतराये कहीं महके तो नज़र आ जाये कहीं
तावीज़ बनाके पहनूं उसे आयत की तरह मिल जाये कहीं
पता चल गया है के मंज़िल कहां है चलो दिल के लंबे सफ़र पे चलेंगे
सफ़र ख़त्म कर देंगे हम तो वहीं पर जहाँ तक तुम्हारे कदम ले चलेंगे
क्यूं बार बार लगता है मुझे कोई दूर छुपके तकता है मुझे
कोई आस पास आया तो नही मेरे साथ मेरा साया तो नही
वो सफर बचपन के अब तक याद आते हैं मुझे,
सुबह जाना हो कहीं तो रात भर सोते नही थे..!
आज थोड़ी बिगड़ी है कल फिर सवांर लेंगे
Zindagi है जो भी होगा संभाल लेंगे…
टूटी फूटी शायरी में लिख दिया है डायरी में
आख़िरी ख्वाहिश हो तुम लास्ट फरमाइश हो तुम
हम झूठों के बीच में सच बोल बैठे, वो नमक का शहर था
और हम जख्म खोल बैठे…
गलती तेरी थी या मेरी क्या फर्क पड़ता है
रिश्ता तो हमारा था ना।
लगता है Zindagi आज खफा है,
चलिए छोड़िए कौनसी पहली दफा है !
अब मत मिलना तुम दोबारा मुझे,
वक़्त बहुत लगा है खुद को संभालने में..!!
बस इतना सा असर होगा हमारी यादों का,
की कभी कभी तुम बिना बात के मुस्कुराओगे..
मुझे मालूम था कि वो मेरा हो नही सकता,
मगर देखो मुझे फिर भी Mohabbat हो गई उससे..
अगर Mohabbat उससे ना मिले जिसे आप चाहते हो,
तो Mohabbat उसको जरूर देना जो आपका चाहते हैं…
इसलिए पसंद है किताब मुझे वो टूटकर बिखर जाना
पसंद करेगी मगर अपने लफ्ज़ बदलना नही..
100 + Great Gulzar shayari || Gulzar shayari on love |Gulzar poetry || Gulzar hindi poetry || Gulzar shayari in hindi
- उम्मीद तो नही फिर भी उम्मीद हो कोई तो इस तरह आशिक़ शहीद हो
- बहुत कम लोग हैं जो मेरे दिल को भाते हैं, और उससे भी बहुत कम हैं जो मुझे समझ पाते हैं..
- दबी-दबी साँसों में सुना था मैंने बोले बिना मेरा नाम आया पलकें झुकी और उठने लगीं तो हौले से उसका सलाम आया
- कोई आहट नही बदन की कहीं फिर भी लगता है तू यहीं है कहीं वक्त जाता सुनाई देता है तेरा साया दिखाई देता है
- तू समझता क्यूं नही है दिल बड़ा गहरा कुआँ है आग जलती है हमेशा हर तरफ धुआँ धुआँ है
- टकरा के सर को जान न दे दूं तो क्या करूं कब तक फ़िराक-ए-यार के सदमे सहा करूं
- मै तो हज़ार चाहूँ की बोलूँ न यार से काबू में अपने दिल को न पाऊं तो क्या करूं
- गुस्सा भी क्या करूं तुम पर तुम हंसते हुए बेहद अच्छे लगते हो !
- एक बीते हुए रिश्ते की एक बीती घड़ी से लगते हो तुम भी अब अजनबी से लगते हो
- प्यार में अज़ीब ये रिवाज़ है, रोग भी वही है जो इलाज है.
- जाने कैसे बीतेंगी ये बरसातें माँगें हुए दिन हैं, माँगी हुई रातें.
- ऐसा कोई ज़िंदगी से वादा तो नही था तेरे बिना जीने का इरादा तो नही था.
- उम्मीद भी अजनबी लगती है और दर्द पराया लगता है आईने में जिसको देखा था बिछड़ा हुआ साया लगता है
- अब टूट गया दिल तो बवाल क्या करें, खुद ही किया था पसंद अब सवाल क्या करें ?
- कयामत तक याद करोगे किसी ने दिल लगाया था, एक होने की उम्मीद भी न थी फिर भी पागलों की तरह चाहा था।
- तुम मिले तो क्यों लगा मुझे, खुद से मुलाकात हो गई कुछ भी तो कहा नही मगर, ज़िंदगी से बात हो गई
- उतार कर फेंक दी उसने तोहफे में मिली पायल, उसे डर था छनकेगी तो याद जरूर आऊंगा मै..
- ठुकराया हमने भी है बहुतों को तेरे खातिर तुझसे फासला भी शायद उनकी बद्दुआओं का असर है।
- वो बेपनाह प्यार करता था मुझे गया तो मेरी जान साथ ले गया
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- मेरी आंखों ने पकड़ा है उन्हें कई बार रंगे हाथ वो इश्क करना तो चाहते हैं मगर घबराते बहुत हैं !
- सालों बाद मिले वो गले लगाकर रोने लगे, जाते वक़्त जिसने कहा था तुम्हारे जैसे हजार मिलेंगे..
- दिल तो रोज़ कहता है कि तुम्हे कोई सहारा चाहिए, फिर दिमाग कहता है क्यों तुम्हे धोखा दुबारा चाहिए..
- झुकी हुई निगाह में, कहीं मेरा ख्याल था दबी दबी हँसी में इक, हसीन सा गुलाल था मै सोचता था, मेरा नाम गुनगुना रही है वो न जाने क्यूं लगा मुझे, के मुस्कुरा रही है वो
- Mohabbat में अक्सर ऐसा होता है, पूरी दुनिया से लड़ने वाला इंसान अपने मन पसंद इंसान से हार जाता है।
- हर कोई परेशान है मेरे कम बोलने से, और मै परेशान हूं अपने अंदर के शोर से..!!
- इस दिल में बस कर देखो तो ये शहर बड़ा पुराना है हर साँस में कहानी है हर साँस में अफ़साना है
- अपनी पीठ से निकले खंजरों को जब गिना मैंने ठीक उतने ही निकले जितनो को गले लगाया था !
- कोई वादा नही किया लेकिन क्यों तेरा इंतज़ार रहता है बेवजह जब क़रार मिल जाए दिल बड़ा बेकरार रहता है
- सब तारीफ कर रहे थे अपने अपने महबूब का, हम नीद का बहाना बना कर महफ़िल छोड़ आए..
- “ सब तरह की दीवानगी से वाकिफ हुए हम, पर मा जैसा चाहने वाला जमाने भर में ना था ! “
- तुम्हारी आदत सी हो गई थी हमें, मालूम तो हमे भी था कि तुम नसीब में नही हो.
- मांगा नही रब से तुम्हे लेकिन इशारा तुम्हीं पर था, नाम बेशक नही लिया मगर पुकारा तुम्हीं को था..
- शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आपकी कमी सी है
- नही करता मै तेरा जिक्र किसी तीसरे से, तेरे बारे में बात सिर्फ खुदा से होती है।
- जो बीत गया है वो अब दौर न आएगा, इस दिल में सिवा तेरे कोई और न आएगा,
- घर फूंक दिया हमने, अब राख उठानी है, Zindagi और कुछ नही, तेरी मेरी कहानी है।
- आइने के सामने खड़े होकर खुद से ही माफी मांग ली मैंने, सबसे ज्यादा अपना ही दिल दुखाया है औरों को खुश करते करते..
- जो हैरान हैं मेरे सब्र पर उनसे कह दो जो आंसू जमीन पर नहीं गिरते वो दिल चीर देते हैं..
- जिसका हक है उसे ही मिलेगा, इश्क पानी नही जो सबको पिला दें
- जर्रा जर्रा समेट कर खुद को बनाया है मैंने, मुझसे ये ना कहना बहुत मिलेंगे तुम जैसे..
- किसी को उजाड़ कर बसे तो क्या बसे, किसी को रुला कर हंसे तो क्या हंसे..!!
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- हमेशा से तो नही रहा होगा तू भी सख्त दिल तेरी भी मासूमियत से भी किसी ने खेला होगा !!
- दर्द भी वही देते हैं जिन्हे हक़ दिया जाता है, वरना गैर तो धक्का लगने पर भी माफ़ी मांग लिया करते हैं।
- तिनका सा मै और समुंदर सा इश्क, डूबने का डर और डुबाना ही इश्क..
- धीरे-धीरे ज़रा दम लेना प्यार से जो मिले गम लेना दिल पे ज़रा वो कम लेना
- तुझे पाने की जिद थी अब भुलाने का ख्वाब है, ना जिद पूरी हुई और ना ही ख्वाब..
- वो हमे भूल ही गए होंगे भला इतने दिनों तक कौन खफा रहता है..
- थोड़ा सा रफू कर के देखिए ना फिर से नई सी लगेगी, Zindagi ही तो है..
- तुझसे दूर जाने का कोई इरादा ना था, पर रुकते आखिर कैसे जब तू ही हमारा न था..!!
- कमियां तो पहले भी थीं मुझमें अब जो बहाना ढूंढ़ रहे हो तो बात अलग है…
- सच बड़ी काबिलियत से छुपाने लगे हैं हम, हाल पूछने पर बढ़िया बताने लगे हैं हम..!
- कहने को तो बस बातें हो जाती हैं, पर दिल खोलकर बात किए हुए जमाना हो गया…
- ख़ामोश रहने में दम घुटता है और बोलने से ज़बान छिलती है डर लगता है नंगे पांव मुझे कोई कब्र पांव तले हिलती है
- नजर भी ना आऊं इतना भी दूर ना करो मुझे, पूरी तरह बदल जाऊं इतना भी मजबूर मत करो मुझे..
- बातों से सीखा है हम ने आदमी को पहचानने का फन जो हल्के लोग होते हैं हर वक़्त बातें भारी भारी करते हैं..
- कोई तो करता होगा हमसे भी खामोश Mohabbat.. किसी का हम भी अधूरा इश्क रहे होंगे…
- बड़े बेताब थे वो Mohabbat करने को हमसे जब हमने भी कर ली तो उनका शौक बदल गया !
- पल्लू गिर गया, पर वो घबराई नहीं उसे यकीन था मेरी नजर झुकी होगी..
- बहुत करीब से अनजान बनके गुजरा है वो शख्स, जो कभी बहुत दूर से पहचान लिया करता था..
- सफर छोटा ही सही पर यादगार होना चाहिए, रंग सांवला ही सही पर वफादार होना चाहिए..
- कौन कहता है कि हम झूठ नही बोलते, एक बार खैरियत तो पूछ के देखिए..
100 + Great Gulzar shayari Aur Gulzar poetry hindi me गुलज़ार शायरी और गुलज़ार पोएट्री हिंदी में
- फिक्र है इज्जत की तो Mohabbat छोड़ दो जनाब, आओगे इश्क की गली में तो चर्चे जरूर होंगे..!!
- Ap Ke Bad Har Ghadi Ham Ne Ap Ke Sath Hi Guzari Hai
- Dikhai Dete Hain Dhund Mein Jaise Sae Koi Magar Bulane Se Vaqt Laute Na Aae Koi
- Lab Pe Aai Miri Gazal Shayad Vo Akele Hain Aj-Kal Shayad
- Khuli Kitab Ke Safhe Ulatate Rahate Hain Hava Chale Na Chale Din Palatate Rahate Hain
Mujh Ko Apana Pata-Thikana Mile Vo Bhi Ik Bar Mere Ghar Ae
Jagane Par Bhi Nahin Ankh Se Giratin Kirchen Is Tarah
Khvabon Se Ankhen Nahin Phoda Karate
Khvabon Se Ankhen Nahin Phoda Karate
Vaqt Rahata Nahin Kahin Tik
Kar Adat Is Ki Bhi Adami Si Hai
Dil Par Dastak Dene Kaun A Nikala Hai Kis Ki Ahat Sunata Hun Virane Mein
Rat Bhar Baten Karate Hain Tare Rat Kate Koi Kidhar Tanha
Sans Mausam Ki Bhi Kuchh Der Ko Chalane Lagati Koi Jhonka Tiri Palakon Ki Hava Ka Hota
Ham Ne Aksar Tumhari Rahon Mein Ruk Kar Apana Hi Intizar Kiya
Kitani Lambi Khamoshi Se Guzara Hun Un Se Kitana Kuchh Kahane Ki Koshish Ki
Aina Dekh Kar Tasalli Hui Ham Ko Is Ghar Mein Janata Hai Koi
Kal Ka Har Vaqia Tumhara Tha Aj Ki Dastan Hamari Hai
Kitani Lambi Khamoshi Se Guzara Hun Un Se Kitana Kuchh Kahane Ki Koshish Ki
Aina Dekh Kar Tasalli Hui Ham Ko Is Ghar Mein Janata Hai Koi
Kal Ka Har Vaqia Tumhara Tha Aj Ki Dastan Hamari Hai
मुस्कुराना, सहते जाना, चाहने की रस्म है
ना लहू ना कोई आँसू इश्क़ ऐसा ज़ख्म है
आखिरी नुकसान था तू Zindagi में,
तेरे बाद मैंने कुछ खोया ही नहीं..
हमने देखी है उन आँखों की खुशबू हाथ से छूके इसे रिश्तों का इल्ज़ाम न दो
सिर्फ़ एहसास है ये रूह से महसूस करो प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो
ख्वाबी ख्वाबी सी लगती है दुनिया आँखों में ये क्या भर रहा है
मरने की Aadat लगी थी क्यूं जीने को जी कर रहा है
रोना उनके लिए जो तुम पर निसार हो,
उसके लिए क्या Rona जिनके आशिक़ हजार हों..
सच कहा था एक फकीर ने मुझसे, तुझे
Mohabbat तो मिलेगी पर तड़पाने वाली !
हर पल में हंसने का हुनर था जिनके पास,
आज वो रोने लगे हैं तो कोई बात तो होगी ना !
तन्हाइयां कहती हैं कोई महबूब बनाया जाए,
जिम्मेदारियां कहती हैं वक़्त Barbad बहुत होगा..
कहीं किसी रोज यूं भी होता हमारी हालत तुम्हारी होती
जो रातें हमने Guzari मरके वो रातें तुमने गुजारी होती
जाने वाला कमियां देखता है,
#निभाने वाला काबिलियत..
मेरे कंधे पर कुछ यूं गिरे उनके आंसू ,
कि सस्ती सी #कमीज़ अनमोल हो गई..
सब खफा हैं मेरे लहजे से,
पर मेरे हालात से वाकिफ कोई नहीं..
Gulzar poetry Hindi
बारिश से बचने की तैयारी जारी है
सारी दरारें बन्द कर ली हैं
और लीप के छत, अब छतरी भी मढ़वा ली है
खिड़की जो खुलती है बाहर
उसके ऊपर भी एक छज्जा खींच दिया है
मेन सड़क से गली में होकर, दरवाज़े तक आता रास्ता
बजरी-मिट्टी डाल के उसको कूट रहे हैं !
यहीं कहीं कुछ गड़हों में
बारिश आती है तो पानी भर जाता है
जूते पाँव, पाँएचे सब सन जाते हैं
गले न पड़ जाए सतरंगी
भीग न जाएँ बादल से
सावन से बच कर जीते हैं
बारिश आने से पहले
बारिश से बचने की तैयारी जारी है।