Rashtriya-Sanskritik kavydhara National cultural poetry राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा

Rashtriya-Sanskritik kavydhara National cultural poetry राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा. India was facing a crisis of economic-political tyranny, exploitation, and oppression under British rule. The desire for freedom was becoming stronger among the countrymen. Eventually, their anger and outrage erupted into a freedom struggle. The nationalism that emerged in our country has three main things

Rashtriya-Sanskritik kavydhara National cultural poetry

Rashtriya-Sanskritik kavydhara National cultural poetry राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा

राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्य धारा
Ans. अंग्रेजों के शासन में भारत आर्थिक-राजनीतिक अत्याचार, शोषण और दमन का संकट झेल रहा था। स्वतंत्रता की कामना देशवासियों में बलवती होती जा रही थी। अंततः उनका क्षोभ और आक्रोश स्वतंत्रता-संग्राम के रूप में फूट पड़ा। हमारे देश में जो राष्ट्रीयता की भावना उभरी उसकी तीन मुख्य बाते हैं 

1. पराधीनता की ग्लानि और उससे मुक्त होने की इच्छा तथा प्रयास।
2. देश की मुक्ति तथा उद्धार के लिए एकता, स्वाभिमान और आत्मविश्वास की भावना तथा स्वतंत्रता-प्राप्ति के लिए देश के गौरवपूर्ण अतीत का स्मरण। 
3. आधुनिक जीवन-मूल्यों के आलोक में वर्तमान व्यवस्था पर पुनर्विचार तथा उसका पुनर्गठन
मानते हैं और ब्रिटिश राज्य के गहनों (हथकड़ियों) को तोड़ने के लिए आतुर हैं। '

नवीन' शोषित-पीड़ितों, भूखे-नंगों को जगाने के लिए शंखनाद करते हैं, रामनरेश त्रिपाठी गरीबों की सेवा को ही सच्ची ईश्वर-भक्ति समझते हैं और दिनकर 'दिल्ली' जैसी कविता के माध्यम से अतीत का गौर-गान भी करते हैं और वर्तमान दुर्दशा पर क्षोभ भी प्रकट करते हैं। इन राष्ट्रवादी भावधारा के कवियों में से अधिकांश गांधीवादी थे और सत्य-अहिंसा सांप्रदायिक सद्भाव के आदर्शों का पूर्णतः पालन करने वाले थे, यद्यपि कुछ सशस्त्र क्रांति के समर्थक भी थे

कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ
जिससे उथल-पुथल मच जाए। दिनकर जैसे कवियों ने महाजनी शोषण के विरूद्ध आवाज उठाई :
हटो व्योम के मेघ पंथ से, स्वर्ग लूटने हम आते हैं।
दूध-दूध ओ वत्स, तुम्हारा दूध खोजने हम आते हैं। हिंदी की राष्ट्रीय-सांस्कृतिक धारा की रचनाएँ मुख्यतः दो प्रकार की हैं

1. तात्कालिक समस्याओं-राजनीतिक परतंत्रता, सामाजिक कुरीतियों, आर्थिक शोषण, गरीबी से संबंधित। इनका लक्ष्य जनता को जगाना, तात्कालिक लक्ष्य-सिद्धि के लिए जन-चेतना पैदा करना है।

2. शाश्वत जीवन-मूल्यों- आपसी भाईचारा, समता, न्याय, बुद्धि और हृदय का समन्वय अहंकार से मुक्ति, सेवा-भाव, सहिष्णुता, धर्म-निरपेक्षता आदि पर बल देने वाली कविताएँ।

Samkalin Aaj Ki Kavita, Contemporary (today's) poem👉 समकालीन (आज की) कविता. 

इस धारा की कविताओं के मूल में पीड़ा की अनुभूति है, चूँकि इनका उद्देश्य जन-चेतना पैदा करना है, अतः वैचारिकता और उपदेशात्मकता अधिक है। अर्थात् कवित्व पर चिंतक, सुधारक, देश-प्रेमी का रूप हावी है। अतः काव्य-कला की दृष्टि से यह बहुत श्रेष्ठ कोटि का काव्य नहीं है।
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