Bhaktikal Se Kya Abhipray Hai | Devoutly mean | भक्तिकाल से अभिप्राय. You have read the compositions of Bhaktikal poets in the lessons of Raidas, Tulsi, Mirabai, etc. You know that devotion means to worship. Anurag in worship etc. and attachment in story etc. is called Bhakti. That is why the time in Hindi literature in which poetry related to the worship of God, hymns, etc.
Bhaktikal Se Kya Abhipray Hai | Devoutly mean | भक्तिकाल से अभिप्राय
Ans. भक्तिकाल के कवियों की रचनाएँ आप रैदास, तुलसी, मीराबाई आदि के पाठों में पढ़ चुके हैं। आप जानते हैं भक्ति का अर्थ है भजना। पूजा आदि में अनुराग तथा कथा आदि में अनुरक्ति को भक्ति कहते हैं। इसीलिए हिंदी साहित्य का वह समय जिसमें ईश्वर की आराधना, भजन आदि
से संबंधित काव्य रचा गया, ईश्वर के अवतारों की कथा गाई गई, 'भक्तिकाल' कहलाता है। ___हिंदी साहित्य के इतिहास में लगभग 1350 ई० से 1650 ई. तक का समय (लगभग तीन सौ वर्ष) भक्तिकाल कहलाता है। इन वर्षों में कवियों ने ईश्वर की आराधना में अपनी सारी रचना-शक्ति लगा दी।
अलग-अलग कवियों ने ईश्वर के निराकार
(जिसका कोई आकार या रूप नहीं) और साकार (जिनका आकार और रूप है) रूप का वर्णन किया और आपसी भेद-भाव भुला कर प्रेम से रहने का उपदेश दिया। धर्म के बाहरी
Sagun Kavya Dhara Kya Hai | Virtuous poetry |👉 सगुण काव्य-धारा.
आडंबरों, दिखावों आदि की आलोचना की और इनकी बुराइयों पर प्रहार किया। ऐसे ही काव्य को भक्ति-काव्य कहा गया। उस काल के प्रमुख कवि कबीर, रैदास, नानक, दादूदयाल, सुंदरदास, मलूकदास, कुतबन, मंझन, जायसी, उसमान, नूरमुहम्मद, सूरदास, परमानंददास, कुंभनदास, नंददास, हितहरिवंश, हरिदास, रसखान, ध्रुवदास, मीराबाई, तुलसीदास, अग्रदास, नाभादास आदि हैं।
