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मिलावट है भोलेनाथ
तेरे इश्क में इत्र और नशे की
तभी तो मैं थोडा
महका हुआ और थोडा बहका हुआ हूँ

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शिव की बनी रहे आप पर छाया
पलट दे जो आपकी किस्मत की काया 
मिले आपको वो सब इस अपनी ज़िन्दगी में
जो कभी किसी ने भी ना पाया

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मुझमें कोई छल नहीं, तेरा कोई कल नहीं
मौत के ही गर्भ में, ज़िंदगी के पास हूँ
अंधकार का आकार हूँ, प्रकाश का मैं प्रकार हूँ
मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ

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Mere Bhole Shankar Teri Mahima Aprampar

ना पूछो मुझसे मेरी पहचान
मैं तो भस्मधारी हूँ
भस्म से होता जिनका श्रृंगार
मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ

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Bholenath Ke status

कर्ता करे न कर सके
शिव करे सो होये
तीन लोक #9 खंड में
शिव से बड़ा ना कोय

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शिव की महिमा अपरम्पार
शिव करते सबका उद्धार
उनकी कृपा आप पर सदा बनी रहे और
भोले शंकर आपके जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ भर दे

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सारा जहाँ है जिसकी शरण में
नमन है उस शिव जी के चरण में
बने उस शिवजी के चरणों की धुल
आओ मिल कर चढ़ाये हम श्रद्धा के फूल

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भोलेनाथ

यह कैसी घटा छाई हैं
हवा में नई सुर्खी आई है
फ़ैली है जो सुगंध हवा में
जरुर महादेव ने चिलम लगाई है

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विश्व का कण कण शिव मय हो
अब हर शक्ति का अवतार उठे
जल थल और अम्बर से फिर
बम-बम भोले की जय जयकार उठे

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Mere Bholenath Ke status new

जिनके रोम रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं
जमाना उन्हे क्या जलाएगा
जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं
जय भोलेनाथ शिव शम्भू

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Bholenath-status

बाबा ने जिस पर भी डाली छाया
उसकी किस्मत की पलट गई काया
वो सब मिला उसे बिन मांगे ही
जो कभी किसी ने ना पाया

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Main shiv hun

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Shiv Photo

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Shivji Status

शिव की ज्योति से नूर मिलता है
सबके दिलो को सुरूर मिलता हैं
जो भी जाता है भोले के द्वार
कुछ न कुछ ज़रूर मिलता हैं

Shiva

Shiva

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Mere Shivji Bhagwan

Shiv Kon hai

जब कभी हम आकाश की तरफ टिमटिमाते तारों को देखते हैं। तो हमारे मन में कई प्रश्न उठते हैं। जैसे इनकी उत्पत्ति कैसे हुई, ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई, हमारी उत्पत्ति कैसे हुई। अगर हम अपने ग्रंथों का वैज्ञानिक विश्लेषण करेंगे तो हमें इनका जवाब जरूर मिलेगा, हिंदू धर्म की शुरुआत शिव से होती है। क्या शिव भगवान है जिसने हमें बनाया। तो फिर शिव को किसने बनाया, मतलब शिव को किसने पैदा किया।

इसका जवाब भी हमें हमारे ग्रंथों में मिलता है। एक बार की बात है एक संत ने शिव से पूछा कि आपके पिता कौन है। शिव ने उत्तर दिया ब्रह्मा।मेरे पिता है। संत ने फिर पूछा आप के दादा कौन है शिव ने उत्तर दिया विष्णु मेरे दादा है। संत ने फिर से पूछा अगर ब्रह्माजी आपके पिता है, और विष्णु आपके दादा है, तो आप के परदादा कौन है। शिव  ने उत्तर दिया मैं खुद ही अपना परदादा हूं।

अगर इस कहानी को हम ध्यान से देखें तो हमें पता लगेगा कि इस कहानी में एक चक्र सा बनता है। जिसकी ना तो कोई शुरुआत है ना ही कोई अंत। अगर हम बिग बैंग थ्योरी को माने तो हमारा ब्रह्मांड एक बिंदु से बना है। जिसमें अचानक विस्फोट हुआ और हमारी स्थिति बन गई। मगर इस बिंदु के पहले था क्या। इस बिंदु के पहले भी तो कुछ रहा होगा। हमारा विज्ञान हमें बताता है। इस बिंदु के पहले यानी कुछ नहीं था।

Shivji bhagwan

केवल एक निरंकार फॉर्म, लास्ट बिना मौत वाला जिसे नस्ट नहीं किया जा सकता कुछ ऐसा ही था। दूसरे शब्दों में कुछ घटित ही नहीं हुआ था। यह बिना किसी स्वरूप वाला था। जो किसी रहस्यमय तरीके से असीम क्षमता वाली ऊर्जा से भरा हुआ था यानी शिव। शिव का भी यही अर्थ होता है दूसरे शब्दों में कुछ नहीं। हमारी मॉडल साइंस ने भी इसे प्रूफ किया है। हर वस्तु कुछ नहीं से आई है। और अंत में कुछ नहीं में मिल जाएगी।

मतलब हमारी सृष्टि की हर वस्तु शिव से ही आई है। और अंत में शिव में ही मिल जाएगी। इस पूरे ब्रह्मांड में केवल शिव ही है जिसका कोई अंत नहीं। दूसरे शब्दों में ब्रह्मांड है या मिस यूनिवर्स है। अगर आप किसी वैज्ञानिक से पूछें कि ऊर्जा  क्या है। जवाब देगा ना ही हम ऊर्जा को बना सकते हैं, ना ही मिटा सकते हैं। बस हम एक रूप से दूसरे रूप में उसे बदल सकते हैं।

अब हम ग्रंथ में देखते हैं उसमें भी यही लिखा है ना बनाया जा सकता है और ना ही मिटाया जा सकता है। मगर उसके कई रूप हैं। हम मरते है जब हमारे शरीर में उर्जा नहीं है मतलब जब हमारे शरीर में कुछ नहीं है तब हमारा शरीर सब बन जाता है। इसलिए शिव हम सबके अंदर है अगर आप यह पोस्ट पढ़ रहे हैं इसका मतलब शिव आपके अंदर है।

हजारों सालों से हर भारतीय जाने अनजाने में इसकी बात जरूर करता है। हम भारतीय विज्ञान को जानते हैं हमारे ग्रंथ भी पूरे विज्ञान पर निर्भर हैं। हमें तो बस विज्ञान की गथीयां सुलझाने के लिए। अपने ग्रंथों की ओर देखना है। हर जवाब वहां मौजूद है। शायद इसलिए हर बड़ा वैज्ञानिक हमारे ग्रंथों का विश्लेषण जरूर करता है।

Shiv Mysterious fact

भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोले नाथ,  आदिनाथ आदि कहा जाता है। उनके बारे में हम आपको आज 35 रहस्यमई तथ्य बताने जा रहे हैं हम आपको भगवान शिव के 35 रहस्यमई तत्वों से आपको रूबरू कराने जा रहे हैं। आइए शुरू करते हैं 

पहला...... आदिनाथ से। सर्वप्रथम शिव जी ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें आदिदेव भी कहा जाता है। आदि का अर्थ प्रारंभ होता है। आदिनाथ होने का कारण उनका एक नाम आदेश भी है। 

दूसरा...... शिव के अस्त्र, शास्त्र, शिव कथा, चंद्रबिंदु, और सुदर्शन, अस्त्र, पाशुपतास्त्र और शस्त्र, त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था। 

तीसरा..... शिव का नाग शिव के गले में जो नाग लपेटा रहता है। उसका नाम वासु की है वासु की के बड़े भाई का नाम शेषनाग है।

Shiva Rahasymayi Tathy

चौथा..... शिव की अर्धांगिनी शिव की पहली पत्नी सती ने हीं अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया। और वही उमा उर्मि और काली कही गई है। 

पांचवा..... शिव के पुत्र शिव के प्रमुख 6 पुत्र है। गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर अय्यप्पा और भुमा सभी के जन्म की कथा रोचक है। 

छठा..... शिव के शिष्य, शिव के साथ शिष्य है। जिन्हें प्रारंभिक सप्त ऋषि माना गया है। इन सप्तर्षियों ने ही शिव के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रसारित किया। जिसके चलते भिन्न-भिन्न उत्पत्ति हुई शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। शिव के शिष्य है बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्ल, सहसरा, महेंद्र, प्रचेताशमणु, भारद्वाज इनके अलावा आठवें गौरशैरसमुनि भी थे।

सातवा..... शिव के गान शिव के गानों में। भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चांदीस , नंदि, श्रृंगी, भृगिरीटी, सैल, गोर्ण, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय प्रमुख है। इसके अलावा पिचास, दैत्य, और नाग नागिन पशुओं को भी शिव का गण माना जाता है। शिवगण नंदी नेहीं  काम शास्त्र की रचना की थी। काम शास्त्र के आधार पर ही काम सूत्र लिखा गया।

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