Jagannath Rath yatra Happy Jagannath puri Status Shayari Quotes. यह रथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध है। देश-विदेश के श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं। रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को विराजित किया जाता है। भगवान जगन्नाथ और अन्य प्रतिमाएं नीम की लकड़ी से बनाई जाती है। जब भी यह महीना आता है
तो पुरानी प्रतिमाओं को प्रवाहित कर नई प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता है। प्रतिमाओं का निर्माण करते समय छोटी-छोटी बातों का जैसे भगवान जगन्नाथ का रंग सावला होता है। इसलिए नीम का वृक्ष उसी रंग का होना चाहिए। भगवान जगन्नाथ की भाई-बहन का रंग उनकी मूर्तियों के लिए हल्के रंग का नीम का वृक्ष ढूंढा जाता है।
Rath yatra Jagannath puri.
भगवान जगन्नाथ बलभद्र और सुभद्रा के रथ नीम की लकड़ी के बनाए जाते हैं। यह लकड़ी वजन में भी अन्य लकड़ियों की तुलना में काफी हल्की होती है। और इसे आसानी से खींचा जा सकता है। भगवान जगन्नाथ की रथ लाल और पीला होता है। बलभद्र और सुभद्रा के रथ के पीछे होता है। भगवान से गरुड़ध्वज नंदीघोष रथ के घोड़ों
के नाम एवं हरिदास सफेद इस रथ के सारथी का नाम पर हनुमान जी का प्रतीक होता है। इसके अलावा भगवान जगन्नाथ के रथ पर सुदर्शन भी होता है। इसे रक्षा का प्रतीक माना जाता है। इस व्रत के रक्षक भगवान विष्णु के वाहन पक्षी राजपुरोहित की ध्वजा यानी झंडा त्रिलोक के वाहिनी कहलाता है। सुभद्रा जी के रथ पर देवी दुर्गा का
प्रतीक होता है रथ के रक्षक दुर्गा और साथ ही अर्जुन होते हैं। शुरुआत सबसे पहले बलभद्र, सुभद्रा के रथ यात्रा शुरू होती है। और सबसे अंत में भक्त भगवान जी की सहायता से खींचना शुरू कर देते हैं। माना जाता है कि इसके बाद भगवान जगन्नाथ मंदिर में निवास करते हैं। और पूरे विधि विधान से उनका पूजन चलता रहता है।
Rath yatra.
गुंडिचा मंदिर में लजीज पकवान बनाकर भगवान जगन्नाथ पुरी का भोग लगाया जाता है। जिसे खाकर भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं। तो उन्हें रोगियों वाला भोजन बनाकर अर्पित किया जाता है। ताकि वह जल्दी स्वस्थ हो जाए। इस यात्रा के तीसरे दिन मां लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिलने आती है। लेकिन द्वारपाल मंदिर का दरवाजा बंद
कर देते हैं। लक्ष्मी जी बने अपने मंदिर में वापस लौट जाती है। इस बारे में पता चलता है। वह लक्ष्मी जी को लेकर उनकी मां लक्ष्मी को मनाने में कामयाब हो जाते हैं। और उस दिन को विजयादशमी रुप में मनाया जाता है। इसके बाद रथ यात्रा के नाम से मनाया जाता है। पूरे 9 दिन के बाद जगन्नाथ मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं। और इस तरह रथ यात्रा खत्म हो जाती है।
Jagannath Rath yatra Happy Jagannath puri Status Shayari Quotes.
जय जगन्नाथ जिसका नाम है, पूरी जिसका धाम है ऐसे भगवन को,
हम सब का परिणाम है, शुभ और मंगलमय हो.
हरे रामा हरे रामा, रामा रामा हरे हरे, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा,
कृष्णा कृष्णा हरे हरे, विशिंग यु & योर फॅमिली हैप्पी जगन्नाथ रथ यात्रा 2020 !!!
जगन्नाथ स्वामी की ज्योति से नूर मिलता है सबके दिलो को सुरूर मिलता है जो भी जाता है
जगन्नाथ स्वामी जी के द्वार कुछ न कुछ जरूर मिलता है. हैप्पी रथ यात्रा 2020 !!!
जब जब होवे धर्म की हानि तब तब अवतारलेवे भगवन कर देवे मर्दन पापियों का मुक्ति देवे
हम पृथ्वी वासियों को बोलो जगन्नाथ प्रभु की जय हैप्पी रथ यात्रा !!!
सूरज की किरणे, खुशियों की बहार, चन्दन की खुशबू,
रेशम का हार, मुबारक हो आपको, भगवन जगन्नाथ का त्यौहार !!!
इस यात्रा में सामिल हो ने के लिए आप सभी लोगो को हमारी
और से शुभकामनायें. हैप्पी जगन्नाथ रथ यात्रा !
सबके दिलो को सुरूर मिलता है जो भी जाता है जगन्नाथ
स्वामी जी के द्वार कुछ न कुछ जरूर मिलता है. हैप्पी रथ यात्रा
Jagannath Rath yatra Status.
हम यह आशा करते हैकि सबको भगवान का प्यार मिले
और सभी अपने जीवन में खुशहाल रहे यही प्राथना करते है. हैप्पी रथ यात्रा
गुलाब की महक, फूलों के हार, भक्तो का प्यार और श्रद्धा से,
खुशियों से बाईट हमारा यह त्यौहार, जगन्नाथ स्वामी की यात्रा
और अषाढ़ी दूज की बहुत सुभेछा. हैप्पी जगन्नाथ रथ यात्रा !
चन्दन की खुशबु, रेशम का हार, भादों की सुगंध, बारिश की फ्हुहार, दिल की उम्मीदे,
अपनों का प्यार मंगलमय हो आपको लार्ड जगन्नाथ का त्यौहार. हैप्पी जगन्नाथ रथ यात्रा !
भगवन जगन्नाथ की कृपा से सुकून मिलता है. सब के दिल बेकरार होते है दर्शन प्राप्त के लिए.
जो भी भक्तो श्रद्धा से दर्शन हो जाता है, उसकी हर एक मनोकामना पूरी होती है जगन्नाथ के आशीर्वाद से.
Rath yatra in puri Shayari.
जगन्नाथ रथ यात्रा कविता इन हिंदी
शुक्ल पक्ष आषाढ़ द्वितीय।
रथयात्रा त्योहार अद्वितीय।
चलो चलें रथयात्रा में।
पुरी में लोग बड़ी मात्रा में।
जगन्नाथ के मंदिर से।
भाई बहन वो सुन्दर से।
जगन्नाथ, बलभद्र हैं वो।
बहन सुभद्रा संग में जो।
मुख्य मंदिर के बाहर।
रथ खड़े हैं तीनों आकर।
कृष्ण के रथ में सोलह चक्के।
चौदह हैं बलभद्र के रथ में।
बहन के रथ में बारह चक्के॥
रथ को खींचों।
बैठो न थक के।
मौसी के घर जाएंगे।
मंदिर (गुंडिचा )हो आएंगे।
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नौ दिन वहां बिताएंगे।
लौट के फिर आ जाएंगे।
बहुड़ा जात्रा नाम है इसका।
नाम सुनो अब कृष्ण के रथ का।
नंदिघोषा, कपिलध्वजा।
गरुड़ध्वजा भी कहते हैं।
लाल रंग और पीला रंग।
शोभा खूब बढ़ाते हैं।
तालध्वजा रथ सुन्दर सुन्दर।
भाई बलभद्र बैठे ऊपर।
नंगलध्वजा भी कहते हैं।
बच्चे, बूढ़े और सभी।
गीत उन्हीं के गाते हैं।
रंग-लाल, नीला और हरा।
ये त्योहार है खुशियों भरा।
देवदलन रथ आता है।
बहन सुभद्रा बैठी है।
कपड़ों के रंग काले-लाल।
दो सौ आठ किलो सोना।
तीनों पर ही सजता है।
खूब मनोहर सुन्दर झांकी।
कीमत इसकी कोई न आंकी।
दृश्य मन को भाता है।
एक झलक तो पा लूँ अब।
विचार यही बस आता है।
चलो चलें रथ यात्रा में।
पुरी में लोग बड़ी मात्रा में॥
POEM ON RATH YATRA
हे प्रभु जगन्नाथ थाम मेरा हाथ,
अपने रथ में ले चल मुझे साथ।
लुभाये न मुझको अब कोई पदार्थ
मेरा तो बस अब एक ही स्वार्थ,
धर्म युद्ध हो या कर्म युद्ध हो
तू बने सारथि, मैं बनूँ पार्थ ।
मैं हूँ अन्जान बन के मेरा नाथ
अपने रथ में ले चल मुझे साथ।









